मुददतो के बाद आज…

मुददतो के बाद आज तुझे मेरा फ़िक्र हुआ !
अब खामोश है यह कलम मेरी…और पन्ने भी सैलाब गए
क्यूंकि अब कई सालो से न तेरा कोई ज़िकर हुआ
लाखो मील चलने का खाब था मेरा तेरे साथ कभी
अब  खाब भी चकनाचूर हुए और वो सफर भी मेरा अब सिफर हुआ
मुददतो के बाद आज तुझे मेरा फ़िक्र हुआ ऐ ज़िन्दगी….

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