Je main kalla hunda…

Main ki karda je main kalla hunda… Gwacheya phirda kite nale hoya jhalla hunda…Par kade likhda oh sachhe j chaar bol main.. Mere aase paase hoya ho halla hunda!!

Pher koi kehnda ki eh changa likhda hai…Koi kehnda ehda kam kodiya de bhaa vikda hai… par kalam meri ne c sir chak k likhna… har akhar pher mera awalla hunda!!

Main ki karda je main kalla hunda…

Haar raah te ik nwa raahi milna c…Mere panneya nu jo saaambh le oh v ik sipahi milna c…Ki pta koi gaanda likhe hoye geet mere…sunda apne he bola nu, jad rawa te main kade kalla hunda!!

Main ki karda je main kalla hunda…

Khamosh ja phirda main kite jogi bnaya…Kisi naakam mahobat da rogi baneya..Kade suni galliya ch bhi rehna changa hunda…kite oh khali mera maholla hunda!

Main ki karda je main kalla hunda…

Inder

Kassh main phir se baccha ho jao…

वो सावन की बारिश, वो बारिश की बुँदे, उन बूंदो ने किया महौले की गलियों में पानी. फिर अपनी ही पुस्तक से इक पन्ने का फटना. और उसकी इक छोटी से कश्ती बनानी. अब करता है मन की उस कश्ती से ही मैं अपनी उन गलियों में जाऊ. दिल करता की काश मैं फिर से
बच्चा हो जाऊ!

वो छत पर भटकना, वह तारे आसमानी, वह चाँद का चमकना वह रातें सुहानी. जिसमे था इक राजा और उसकी दीवानी. काश कोई सुनादे वो नानी की फिर से कहानी. तब सोचा था की उस रानी को जाकर मैं बचाऊ. अब चाहता हूँ फिर से मैं बच्चा हो जाऊ!

वो सावन की बारिश, वो बारिश की बुँदे,

वो दोस्तों का मिलना और फिर मिल कर बिछड़ना. दिन भर थे खेलते ओर कभी ना पड़ना. हाँ पर छोटी सी बात को लेकर वो हर रोज का लड़ना.वह किसी की नयी साइकिल देख कर अंदर से सड़ना,आज मिले वो कभी तो उसे लड़ने का कारण बताऊ. दिल करता है मैं फिर से बच्चा हो जाऊ!

वो सावन की बारिश, वो बारिश की बुँदे,

ना पैसे का डर था ओर ना कोई फ़िकर था बस छोटा सा वो अपना ही इक घर था, गली में रुक कर पापा का इंतज़ार करना, ओर नीला सा उस बस का कलर था, घर से स्कूल और स्कूल से घर, बस यही तो इन्दर का रोज का ही सफर था.आज सोचता हूँ की वापिस अपने स्कूल के रस्ते पर जाऊ. काश मैं फिर से बच्चा हो जाऊ!
वो सावन की बारिश, वो बारिश की बुँदे

कभी बैठूँ तो सोचता हूँ की वो क्या ख़ास पल थे. ऐसा लगता है जैसे अब वो गणित के सवाल कितने सरल थे. जिसके लिए कितने थप्पड़ थे खाए, ओर उसके बाद आँखो से कितने आँसू थे आए. अब चाहता हूँ वापिस वो परीक्षा मैं दे आऊँ. काश मैं फिर से बच्चा हो जाऊँ।
वो सावन की बारिश, वो बारिश की बुँदे
Inder