Woh raste woh Manjile

एक राही चला रस्ते पर अपनी मंजिल को पाने के लिए
मंजिल भी खड़ी थी आगे उसे आजमाने के लिए
खाली हाथ लोटा वह उस मंजिल से उदास हो कर
अब वो रस्ते ले गए उसे मयखाने में गम छुपाने के लिए

Inder

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